Saturday, December 28, 2019

Why Mobile Is Important?


As we all aware about the today's generation and mobile. No one can live without cell phone. Lot of people are mad about it. No one can using 100% of features from the mobile. Some people purchasing costly mobile only for show off because they have lot of money. Need to identify some pro and con from it.

Is it mobile useful?
Yes, no doubt about that. If u say 'how?' then let's see an importance first.

Immediate communication.
Mobile is best source of Immediate communication with individual person. In case of any medical emergency this is very important source to communicate with blood donor. Now a day some people are having their identity with their mobile number. We can communicate with multiple people who are at different location. 

Entertainment.
Today lot of people using mobile for entertainment purpose. Lot of apps are available for entertaining purpose. Creating video is a best source to entertaining other. 

Creating own identity.
We are creating our identity with mobile apps like some general knowledge, teaching, guidance etc. lot of things we can do with our mobile to create own identity.

Official use.
We can use this mobile official purpose like mailing, messaging, small task like calculation, reminder and  meeting schedule etc.

Keeping our memories alive.
We can keeping our memories alive with the Photos of events, picnic, tour, climate etc. and we can also capture video of each and every movement in our life like marriage, birthday, adventure tour etc.

Always keep you update.
Mobile is best source of keep you update. Surrounding area like traffic update, news, event/activity of our dear ones life. Its is like Remote Operator of your Personal things.

Best education source.
Parents are very conscious about their children education. some parents are not having time for their child due to the job or many more reasons. So, they can use the mobile for education purpose also. Lot of educational websites and app are available for online education. We can also carry soft copy on our mobile in PDF or word format for read anywhere.

All in one.
We can get all in one in single device like time, calculator, calendar, torch, entertainment, official work, touch with your love one, education, finding remote location or direction of any other object / person, magnifier, accessibility, you can operate your home equipment on fingertips.

This is a little brief on use of our mobile device. I know we all are aware about all these things, but still some people are not using all features as I said earlier. Today children are engaging only on videos, gaming, entertainment, selfie and lot of unwanted things. So, We can cover it on "How To Handle Mobile and Children?" Parents role is very important in this.





Monday, December 23, 2019

हम तो लडकियां है ना..!

हम सभी पाठशालाओंकी छुट्टीयोको अपने अपने गाव में जाते है। गाव में तो मौसम बहुत अच्छा होता है। हर साल छुट्टीयोको गाव में जाना तो अब आदत सी हो गई है। बहुत दिनों बाद गाव को देखके हमें बहुत सुकून मिलता है। वहां की ताजी हवायें, वहां का साफ पानी, बहती नदियाँ, सभी जगह खेतो की हरियाली ये सब तो जैसे स्वर्ग जमीनपर उतरा है ऐसा प्रतीत होता है।

ऐसे ही एक साल मई महीने में हम गांव गए थे। शहर का बाबू आया, यह देखने के लिए पड़ोस के लोग जमा हुए थे। खास कर गावों के बच्चो को शहर के बच्चो का बड़ा आकर्षण होता है। संध्या का समय बहुत अच्छा लग रहा था।

बाते करते करते समय बीतता जा रहा था, पर हम बातोमे ही लगे पड़े थे। बहुत सारी बातें चल रही थी, अचानक सवाल किसीने पूछा था। "शहरो में लड़किया स्कूल कैसे जाती है?" तो मैंने कहा पैदल, बस, या फिर गाड़ी से। तो फिर दूसरा सवाल आया, "क्या उन लडकियोंको डर नहीं लगता?" मैंने चौंक के कहा "डर, किस बातका?" तो जवाब आया, "आवारा लड़कोंका!" मैंने कहा, "वहाँ की लड़कियां बहुत निडर होती है!"

क्यों क्या हुआ, तो वो बोली "यहाँ कुछ लड़के हम लडकियोंको रोज परेशान करते है! तो मैंने उनको कहा, "जितना डरोगी उतना वे परेशान करते रहेंगे आप निडर हो के उनका सामना करना चाहिये ना की चुप रहके!"

उन्होंने कहा, "हम कैसे कर सकेंगे, हम तो लडकियां है ना!" मैंने कहा क्या तुम गावके बुर्जुग लोगोको यह बात बताके उनको ध्यान रखने के लिए नहीं कह सकती? या फिर, पुलिस को बताके या फिर खुद कुछ क्यों नहीं करती जैसे की, उनको खुद ही एक बार जोर से चेतावनी दे दो की, अगली बार अगर हमें परेशांंन किया तो पुलिस को बताऊंगी या फिर हम सबका तुम यही मार खाओगे!" ये सलाह देने के बाद हम सब खाना खाके सो गए और छुट्टियां ख़त्म होने के बाद, हम अपने घर लौट गए।

छह माहीने बाद हमें एक शादी के लिये गाव को जाने का अवसर मिला। उसी शादी मै वो सवाल पूछने वाली रिश्तेदार लड़की से मुलाकात हुई तो उसने बताया, "जैसे अपने चेतावनी के बारे में बताया वैसे ही हमने बुर्जुगो को बताके उनको चेतावनी दी थी, और तुरंत उसके दूसरे दिन से लडके कभी आस पास भी दिखाई नहीं दिए!"

 ये जो बात अभी अपने पढ़ी ये बात सिर्फ शहरोंमें ही नहीं गावों में भी होती है और एक छोटासा मार्गदर्शन इन लड़कियों की प्रेरणा बन सकता है।

हम अगर निडर नहीं बनेगे तो आगे चलकर हमें बहुत परेशानियोंका सामना करना पड़ सकता है।हमें अपने अंदरके डर को हटाना होगा। ऐसे हालात लड़कियां खुद बदल सकती है। क्योंकि जब तक वे आवाज नहीं उठाती तब तक किसीको पता ही नहीं चलेगा और ऐसे लोगोंकी हिम्मत हर वक्त बढ़ती रहेगी।

मैं कुछ नाम यहाँ देना चाहता हूँ, जो की आपको प्रेरित करते रहेंगे। जिन्होंने अलग अलग क्षेत्र में अपना योगदान दिया है। अगर इन महिलाओने इसी तरह सोचा होता तो आज ये नाम शायद किसी को पता नहीं होता।

अ) रानी लक्ष्मीबाई - प्रथम महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी.
१) सावित्रीबाई फुले -प्रथम महिला शिक्षिका।
२) आनंदी गोपालराव जोशी - प्रथम महिला डॉक्टर।
३) रमाबाई रानडे -  प्रथम महिला अधिकार कार्यकर्ता।
४) इंदिरा गाँधी - प्रथम महिला प्रधान मंत्री।
५) मदर तेरेसा - प्रथम सामाजिक सेविका।
६) प्रतिभाताई पाटील - प्रथम महिला राष्ट्रपति।
७) कल्पना चावला - प्रथम अंतरिक्ष जाने वाली महिला।
८) फातिमा बीवी -  प्रथम महिला न्यायाधीश।
९) सानिया मिर्ज़ा - प्रथम महिला है जो की जीती है महिला टेनिस एसोसिएशन (WTA) और विश्व में नं. १ हासिल किया है।
१०) साइना नेहवाल - प्रथम महिला जो की बैडमिंटन ओलंपिक्स पदक जीती है, और विश्व में नं.१ हासिल किया है।
११) बचेंद्री पाल - माउंट एवेरेस्ट की चोटी पर पहुचने वाली प्रथम महिला।
१२) मेरी कॉम - ६ बार World Amateur Boxing champion जीती हुई प्रथम महिला।
१३) किरण बेदी - प्रथम महिला आई. पी. एस. (I.P.S.)
१४) अन्ना मल्होत्रा - प्रथम महिला आईएएस (I.A.S.)
१५) प्रिया झिंगन - प्रथम भारतीय सेना महिला अधिकारी।
१६) गुंजन सक्सेना और दीपिका मिश्रा प्रथम महिलायें भारतीय वायु सेना।
१७) भारत के विशेष बल डॉ. सीमा राव (India's Wonder Women) प्रथम भारतीय कमांडो ट्रेनर।
१८) टेसी थॉमस - प्रथम महिला वैद्यानिक जो की मिसाइल परियोजनकी मुख्य अधिकारी है।

इन महिलाओने आसानी से यह ऊचाई हासिल नहीं की है। ये सब अनगिनत कठिनाओसे बाहर निकलकर आगे आयी है। अगर यह सब ऐसी सोच रखती तो शायद आज इनका नाम तक हमे पता नहीं होता।

यह सब नाम पढनेके बाद किसी लड़कियों या महिलाओंके मनमे डर नहीं रहना चहिये। जब तक आप खुद मानसिक तौर पर मजबूत नहीं होते हो तब तक आप किसी भी परिस्थितिका सामना नहीं कर सकते है। 

क्या आज भी ऐसा सोचनेवाली लड़कियां  है? अगर हा, तो ऐसी सोच इनको बदलनी चाहिए। और यह कहना चाहिए, "हा हम लड़कियां है और हम सब कुछ कर सकती है!"

Thursday, December 19, 2019

माता-पिता की जिम्मेदारियाँ.


हमारे जीवन में बोहोत सारी जिम्मेदारियाँ होती है. इसमें हम सब अलग अलग किरदार अदा करते है. जैसे की बच्चोंका, युवा का, जिम्मेदार नागरिक या फिर व्यक्ती, जैसे की माता-पिता, चाचा-चाची, नाना-नानी इत्यादी.
और इन जिम्मेदारियो मे से एक परिजनोका किरदार सबसे महत्वपूर्ण है. हम इसको बहु कार्यकारी कह सकते है.

क्यों बहु कार्यकारी?
इस उम्र में माता पिताकी जिम्मेदारियां ज्यादा होती है. अपने बच्चोके प्रति, माता-पिता के प्रति, सामाजिक और कार्यालयीन इत्यादी. हर एक जिम्मेदारी के प्रति उनका बर्ताव अलग होता है. जैसे की हम जानते है की आज कल के बच्चोको संभालना इतना आसान नहीं रहा। और बढ़ोकि अलगही आशाएं होती है अपने बेटे या बहु से। और अगर सामाजिक जिम्मेदीरीओ की बात की जाये तो वो बयां भी नहीं कर सकते।
   
क्या माता-पिता का किरदार ज्यादा कठीन होता है अपने दफ्तर के कामसे?
पहले तो हमें परिस्थितिओको समझना चाहिए। दफ्तर का काम करने से पहले हम ने पाठशाला, महाविद्यालय में 
और दफ्तर प्रशिक्षण दे दिया जाता है, पर अगर बात करे माता-पिता की जिम्मेदारिओकी तो इसके लिए ऐसा कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। ये तो सिर्फ हमारे पुराने खुद के अवलोकन पे और बढ़ो के मार्गदर्शन पे निरभर करता है। 

क्या बुजुर्गोका मार्गदर्शन जरुरी है?
इसमें कोई शंका या दोहराई नहीं है, क्योकि हमारे पास कोई शैक्षणिक उपलब्धता नहीं है जो की हमें बच्चो को कैसे संभालना है ये सीखा सखे। हमारे संस्कार जिन्दा रखने के लिए बुजुर्गोका मार्गदर्शन अत्यावश्यक है। इस मार्गदर्शन के वजहसे बच्चो को संभालनेके हमें बहोतो से मार्ग मिल जाते है। बहोतसे परिवार शहरोमे रहते है जो की बुज़ुर्गोंका साथ रहना पसंत नहीं करते पर वे बुज़ुर्गोंके मार्गदर्शन का महत्त्व नहीं जानते।

संस्कार।
जिम्मेदारियोंमे यह एक पहेली महत्त्व पूर्ण जिम्मेदारी है।  यह सिर्फ अपने एक माता-पिता की नहीं यही बलकी सभी माता-पिताओंकी है। क्योकि सभी बच्चे एक साथ बड़े होते है और वे सब भविष्यके अच्छे समाजका हिसा है। भले हमारा बच्चा बुरा बर्ताव करे हम दुसरेके बच्चों को ही कोसते है, हम हमारे बच्चों को मार्गदर्शन नहीं करते। हम हमारे बचेको सलाह देते है की उसके साथ नहीं खेलना। कुछ माता-पिता तो अपने बच्चों के सामनेही झगड़ते है पर वे यह भूल जाते है की उनके बच्चे यह सब उनसे सिख रहे है।

शिक्षात्मक जिम्मेदारियाँ। 
सभी माता-पिता अपने बच्चों के अच्छे भविष के लिए बोहोत प्रयत्न करते है। हमारे बच्चे किस दिशा में इच्छुक और अग्रेसर है  और कहा वे संतुष्ट है यह जानना जरुरी है। अपने बचे के पढाई के लिए माता-पिता शिक्षण पे कर्जा उठाते है और आशा करते है की उसने कामकाज ही  करना चाइये, परंतु वे यह भूल जाते है की अपने बच्चों के इच्छायें  क्या है। 

सामाजिक जिम्मेदारियाँ। 
ये सबसे महत्वपुर्ण जिम्मेदारी है जो की अपने बच्चोको सिखानी जरुरी है। पर माता-पिता इसमें सफल नहीं हो पाते। हम सिर्फ यही सिखाते है की कैसे अच्छी जिंदगी जीने के लिए पैसे कमाए जाये, और इसी वजहसे हमारे बच्चे  खुदगर्ज बन जाते है। सामाजिक जिम्मेदारिया जैसे की दुसरोको मदत करना , सरकार और सामजिक कामो में हाथ बाटना इत्यादि. समाजमे बेहतर इंसान बनानेके लिए यह बोहोत प्रभवी चीज है।

अपने माता-पिता की जिम्मेदारियाँ। 
जी हाँ अपने माता पिता की जिमेदिरियाँ। आज की पीढ़ी बहोतसे कारणोंके कारण अपने माता-पिता को संभालती नहीं है। इसी कारण बहोतसे बुजुर्ग वृद्धाश्रम में रहते है। पर वे यह भूल जाते है की उनके बच्चे यह सब उनसे सिख रहे है। जो माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों के अच्छी परवरिश में गुजारते है और आजकी पीढ़ी यह सब भूल जाती है। इसी कारन बहोतसे बुजुर्ग परेशानी में जीते है।

निर्णय लेनेकी आज़ादी।
सभीको सोच के निर्णय लेने की आज़ादीकी जरुरत है।  हमारे बच्चे कोई मशीन या रोबॉट नहीं है। हमें बच्चोंको  उनका लक्ष्य चुननेका और निर्णय लेनेका अवसर देना चाहिए। उनके सपने पुरे करनेके लिए जिन्दागी के हर मोड़ पे हमें उनकी मदत करनी चाइये।

इसी वजहसे माता-पिता इस समाजका महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो की खुदकी ख्वायिशो का त्याग करते है अपने बच्चों , समाज और माता-पिता के लिएउनके व्यवहार का असर आजकी पीढ़ियों पड़ता है। वे हमारे समाजके मार्गदर्शक है।  उनके निर्णय बोहोत मायने रखते है भविष्य के लिये।

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