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Monday, March 29, 2021

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 3)

 

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 3)


शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 2)


व्यवहार।

कुछ लोग नए सदयसे के साथ अलग तरह का व्यवहार करते हैं, जिस तरह उनके शादी के समय उनके साथ हुआ था। अधिकांश सास अपनी बहू के साथ अपने पहले के जीवन की तरह व्यवहार करती हैं। इस मामले में बहू प्रतिबंधित पारिवारिक माहौल में असहज महसूस करती है और इसीलिए ऐसे परिवार में बहस शुरू हो जाती है। प्रत्येक परिवार के सदस्य को यह समझना चाहिए कि, यदि उन्हें अपने जीवन में बहुत प्रतिबंध का सामना करना पड़ा है, तो उन्हें दूसरे व्यक्ति को प्रतिबंधित नहीं करना चाहिए और इस तरह की सोच और व्यवहार को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। समय के साथ हमें समाज और स्वतंत्रता के बदलावों को अपनाना चाहिए। गलतफहमी के विभिन्न कारण हैं जैसे बाहरी संबंध, दुर्लभ संचार, स्वयं / पुरानी सोच, सोशल मीडिया प्रभाव, समझ की क्षमता की कमी, स्वार्थी -व्यवहार आदि।


गलतफहमी।

दांपत्य जीवन में यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। एक गलतफहमी दोनों परिवार के जीवन को नष्ट कर सकती है। हमारे आस-पास में पहले से ही विभिन्न घटनाएं हुई हैं। गलतफहमी के विभिन्न कारण हैं जैसे बाहरी संबंध, दुर्लभ संचार, स्व / पुरानी सोच, सोशल मीडिया प्रभाव, समझ की क्षमता की कमी, आत्म-व्यवहार आदि। गलतफहमी से बचने के लिए किसी के व्यवहार के अंतिम निष्कर्ष से पहले हमें इस तरह के व्यवहार के पीछे की वजह को समझने की कोशिश करनी चाहिए।


अलग कमाई।

हर किसी को अपने सपने को पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत होती है। हर परिवार के सदस्य के पास कमानेका एक अलग स्रोत और भिन्नता होती है। और अधिक कमाई से भी विवाहित जीवन में अनावश्यक परेशानी पैदा होती है। हर जोड़े को समझना चाहिए कि, उनकी कमाई की राशि हमेशा उनके परिवार के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। यदि आपके पैसे घर के लिए उपलब्ध नहीं हैं तो उस पैसे का कोई मूल्य नहीं है। शादी से पहले या शादी के बाद, आपको अपने परिवार के लिए पैसा बचाना चाहिए।


अहंकार।

यह बात हर व्यक्ति को अलग-अलग स्तर की होनी चाहिए। लेकिन आप सीख सकते हैं कि मुश्किल स्थिति को कितना और कैसे संभालना है। दांपत्य जीवन में आपको हर बार अपने अहंकार को नहीं ढोना चाहिए। अगर परिवार का कोई भी सदस्य अहंकारी है तो परिवार में लड़ाई को कोई नहीं रोक सकता। शादी प्यार, समझ और समायोजन के बारे में है। ऐसे लोगों से हर एक को सचेत रहना चाहिए क्योंकि आप कभी नहीं जानते कि उसका अहंकार कब जग जायेग। 


संवादहीनता।

संचार एक दूसरे को समझने का बहुत अच्छा स्रोत है। विभिन्न कारणों से संभाषण गलत हो जाता है या दिन-प्रतिदिन संभाषण की खाई बढ़ती जा रही है। विभिन्न मुद्दों, कार्य अनुसूची, कुछ समय की गलतफहमी, दूसरे व्यक्ति की कम सुनने की क्षमता हमेशा परेशान पारिवारिक जीवन की ओर ले जाती है। कुछ लोग अपने अहंकार के कारण या सबक सिखाने के लिए अपने साथी के साथ संवाद नहीं करते हैं लेकिन इस तरह की सोच अधिक गलतफहमी पैदा करती है। इसलिए, बेहतर विवाहित जीवन के लिए एक-दूसरे के साथ संवाद करने की कोशिश करें क्योंकि अच्छा संभाषण समस्या का समाधान करता है।


मध्यस्थ।

शादी तय करते समय मध्यस्थ बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्हें दोनों परिवारों की अच्छी जानकारी होती है। एक मध्यस्थ के रूप में कुछ विवाह बीरो भी काम करते हैं। मध्यवर्ती की एक गलती किसी भी के पूरे जीवन को नष्ट कर देगी। शादी को तय करते समय हर मध्यस्थ को इसका ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यह एक या दो दिन का मामला नहीं है।


फैसला

शादी तय करते समय सही निर्णय लेना बहुत महत्वपूर्ण है। आपकी खुशी आपके निर्णय पर निर्भर करती है।शादी तय करने के लिए या शादी के अपने फैसले को अंतिम रूप देने से पहले आपको अपने परिवार और अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेनी चाहिए। कुछ लोग एक गलत निर्णय के कारण अपने पूरे जीवन को पीड़ित करते हैं।


दूसरों के विवाहित जीवन के साथ तुलना।

कुछ लोग अपनी जिंदगी की दूसरों की जिंदगी से ज्यादा तुलना करते है। ज्यादातर ऐसा पड़ोसी या भाई के साथ होता है। ऐसी तुलना के कारण, परिवार में अनावश्यक लड़ाई पैदा होती है। तुलना के विभिन्न कारण हैं। कभी-कभी यह तुलना आक्रामक रूप ले लेती है और वैवाहिक जीवन को बिगाड़ देती है। इसलिए, दूसरे के साथ तुलना से बचने के लिए बेहतर है और आपके पास जो कुछ भी है उसके साथ आनंद लें। अपने बेहतर विवाहित जीवन के लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित करने की कोशिश करें और अपने सपनों को प्राप्त करें।


गोपनीय बातें।

हर एक बहुत अच्छी तरह से जानता है गोपनीय बात किसी के साथ खुलासा नहीं करना चाहिए। हर जोड़े और परिवार में गोपनीय बातें होती हैं और ऐसी बातों का तीसरे व्यक्ति के साथ खुलासा नहीं करना चाहिए। जब अन्य व्यक्ति के साथ गोपनीय बात का खुलासा किया जाता है तभी निश्चित रूप से घर के सदस्यो में गलतफहमी पैदा होती हैं और वैवाहिक जीवन में झगडा उत्तपन्न होता है। किसी भी दंपति द्वारा व्यक्तिगत और गोपनीय बातों का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि दूसरों के विश्वास की बात है।


विश्वास।

दो अज्ञात व्यक्ति अपना पूरा जीवन बिताने के लिए एक दूसरे के साथ आते हैं। वे भरोसे के साथ अपनी गाँठ बाँध लेते हैं। कुछ गलतफहमी, अहंकार, वित्तीय स्थिति, स्वतंत्रता, कम पारिवारिक समय आदि के कारण विवाहित जीवन में परेशानी आती है। उसी के कारण कुछ लोग अपने जीवन साथी से अपना विश्वास खो सकते हैं। ऐसी स्थिति में हम अंतिम तर्क को उचित कारण खोज सकते हैं। क्योंकि आपके जीवन साथी ने आपके साथ अपना जीवन बिताने की शपथ ली थी।


इसको समझनेके बाद ऐसी गलती हम न दोहराए। एक गलत फैसला आपकी पूरी जिंदगी खराब कर सकता है। मैंने यह समझाने की कोशिश की है कि शादियां क्यों असफल होती हैं। हर बार स्थिति और कारण अलग होते हैं लेकिन कुछ गलत होने से पहले हम किसी की जान बचा सकते हैं। यह व्यक्ति के जीवन का बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है। जब कोई भी उस समय इस स्थिति से पीड़ित होता है तो एकल व्यक्ति इसमें शामिल नहीं होता है, दोनों परिवार और उनके रिश्तेदार भी पीड़ित होते हैं। इसलिए शादी से पहले सोचें क्योंकि यह जीवन की नई शुरवात है.  जो की जिंदगी भर दो दिलोको जोड़ती है। 


शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 1)

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 2)


Sunday, January 31, 2021

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 2)

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 2)

 

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 1)


माता-पिता का हस्तक्षेप।

विवाह के निर्णय में माता-पिता का मार्गदर्शन अधिक महत्वपूर्ण है। लेकिन शादी के बाद हमें बच्चों के जीवन में बहुत ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। बहुत अधिक हस्तक्षेप के कारण कुछ अप्रत्याशित समस्या उत्पन्न होती है। मुझे पता है जब बेटी अपने पति के साथ जाती है तो माता-पिता उस समय अकेलापन महसूस करते हैं। उन्हें उस समय उसके साथ संवाद करना चाहिए। उसे एक नए परिवार के सदस्य के साथ घुलने मिलने का समय दें और उसके नए जीवन का आनंद लेने के लिए समय दें। उसे जीवन का अपना फैसला लेने का मौका दें। जब भी उन्हें आवश्यकता होती है तभी आप उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं।


दबाव और मांग।

कुछ दंपति शादी के बाद अपने साथी से अनावश्यक चीजों की मांग करते हैं जैसे दहेज, अव्यवहारिक जीवन और अनुचित चीजें। इसकी वजह से महिला के साथ पुरुष को परेशानी से गुजरना पड़ता है। महिलाएं पति पर उनकी मांगे पूरी करने के लिए दबाव डालती है या फिर पति दबाव डालता है अपनी पत्नी पे। ऐसे समय में दोनों ने अपने हैसियत के हिसाबसे घर का आर्थिक स्थिति या फिर घर के खुशहाली को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।  


स्वतंत्र परिवार की मांग।

आज कल के दौर में स्वतंत्र परिवार की मांग ज्यादा बढ़ गई है। लोग समझते है की स्वतंत्र परिवार से ज्यादा प्रगति होती है। यह तो बहोत बड़ा चर्चा का विषय है। पर यह बहोत जरुरी कारण है रिश्तोमे दरार लाने का। हमें यह जान लेना चाहिए की इसमे कुछ ही परिवार आगे बढ़ पाते है। संयुक्त परिवारों की तुलना में स्वतंत्र परिवारों को हमेशा बहुत तकलीफ  से गुजरना पड़ता है। हमारे बच्चे हमसे यही तो सिखते है। इसका असर हमारे भविष्य पर भी पड़ेगा.


पुरानी और नई सोच।

नई सोच होना अच्छी बात है। पर नई सोच के साथ हमें पुराने ख़यालात के लोगोंके ख़यालों का भी विचार करना चाहिए। जब कोई किसी विचार के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है तो रिश्तों में समस्या शुरू हो जाती है। जब भी हमारी उनसे विचारोसे लेकर बात हो तो शांति पूर्वक चर्चा होनी जरुरी है। कुछ समय हमें उनकी सोच के साथ समायोजित करना चाहिए और कुछ समय उन्हें नए विचारों को स्वीकार करना चाहिए।पुराने और नए विचार के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है।


एक दूसरे के लिए कोई सम्मान नहीं।

सम्मान एक बड़ा शब्द है। किसी को भी अपने साथी के प्रति अपमानजनक व्यवहार करने का अधिकार नहीं है। कुछ पुरुष प्रधान परिवारों में महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता। हमें एक-दूसरे को सम्मान देना चाहिए। समान बात ससुर और सास के प्रति लागू होती है। इस वजह से परिवार में झगड़ा होता है। हमें उन्हें भी सम्मान देना चाहिए। आप हमेशा उन्हें अपने पिता और माता के रूप में मान सकते हैं। ससुर और सास को अपनी बहू और दामाद को भी सम्मान देना चाहिए।


कम समायोजन।

शादी एक समायोजन है। जब दो अलग-अलग अज्ञात व्यक्ति और परिवार एक साथ आते हैं और अपना जीवन शुरू करते हैं और नए रिश्ते का निर्माण करते हैं, तो यह उतना आसान नहीं है जितना हम सोचते हैं। जब हम अपने नए परिवार के सदस्य को समझने की कोशिश नहीं कर रहे होते हैं तो परिवार का हर सदस्य इसके कारण पीड़ित होता है। शादी से पहले और बाद में हमें एक-दूसरे और परिवार के अन्य सदस्य के साथ संचार के लिए नए जोड़े को समय देना चाहिए। यह विधि परिवार के प्रत्येक सदस्य के बीच अच्छे संबंध बना सकती है।


स्वतंत्रता।

स्वतंत्रता जीवन का महत्वपूर्ण भाग है और जिसकी जरूरत सभी को है। कुछ प्रतिबंधों के कारण कुछ लोग उसकी स्वतंत्रता का आनंद नहीं ले सकते। व्यक्ति का व्यवहार उनके परिवार की नैतिकता पर निर्भर करता है।यह नैतिकता नवविवाहित जोड़े के लिए प्रतिबंध पैदा करती है। समय के साथ हमें परिवार के प्रत्येक सदस्य को सहज बनाने के लिए नई चीजों को स्वीकार करने की आवश्यकता है। हर नए जोड़े को दोनों परिवार की अच्छी नैतिकता का सम्मान और पालन करना चाहिए।


परिवार के लिए समय नहीं।

विभिन्न कारणों के कारण हम अपने परिवार को समय नहीं दे पाते हैं। जैसे की , काम में व्यस्त होना, अलग घरकी जिम्मेदारियां।  इस कारण हम अपने घवालोंको समय नहीं दे पाते। और इस वजहसे घर में झगड़ा शुरू हो जाता है। यह सभी रोकने के लिए हमें अपने परिवार को समय देना जरुरी है। या फिर हम समय निकालके घूमने भी जा सकते है। यह आपके आगे के संबंधों और दिनों को ऊर्जावान बनाने के लिए परिवार के साथ संचार और ताजगी बढ़ाने के लिए अच्छा है।


काम की स्थिति।

हर किसी के काम करने का माहौल, समय, लक्ष्य और स्थिति अलग-अलग होती है। कुछ लोग काम के दबाव के कारण अपने साथी को समय नहीं दे पाते हैं और अनजाने में व्यक्ति परिवार पर गुस्सा हो जाता है और अपने ही रिश्ते को बिगाड़ देता है। इसलिए, हर कामकाजी व्यक्ति को यह सीखना चाहिए कि काम और हमारे रिश्ते को कैसे संभाला जा सकता है।


समाज का डर।

मानव समाज के बिना नहीं रह सकता। यहां तक कि व्यक्ति का व्यवहार भी उनके समाज पर निर्भर करता है।वेअपनी बहू को समाज के डर के कारण अनिश्चित वित्तीय स्थिति में घर से बाहर काम करने की अनुमति नहीं देते हैं। समाज के डर के कारण, कुछ परिवार अभी भी अपनी बहू को आगे की शिक्षा के लिए अनुमति नहीं देते हैं। इस तरह का व्यवहार उनकी शादी पर असर डालता है। समाज और समाज से डरने वाले लोगों को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है।


भाग - 3 (जल्द आ रहा है।)

Sunday, January 24, 2021

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 1)

शादियां असफल क्यों होती है ? (भाग- 1)


आज कल की जिंदगी बहुत भागदौड़ भरी है। इसमें हम बोहोत व्यस्त रहते है। वैवाहिक जीवन हमारे जिंदगीका बहोत अहम् हिस्सा है। इसमें हम एक दूसरे का सारी जिंदगी खयाल और साथ निभानेकी कसम खाते है। पुराने जमाने की शादियां एक मिसाल होती थी। जो की पूरी जिंदगी एक दुसरेके साथ होते थे। पर अब ऐसा क्या हुआ, जो  की आज  कल की शादियां एक महीना या फिर एक साल तक भी नहीं चलती और तलाक का अनुपात दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तो चलो देखते है किस वजह से आज के वैवाहिक जीवन सफल नहीं हो पाते।


बहुत उम्मीदें।

जीवन सभी उम्मीदों के बारे में है और जब भी आपके वैवाहिक जीवन में आशाएं पूरी नहीं होती है तो  तभी वैवाहिक जीवन खराब हो जाते हैं। आज की पीढ़ी को अपनी शादी से बहुत ज्यादा उम्मीद है। वे बहुत पैसा, घर, कार और अपने साथी से उच्च जीवन स्तर की उम्मीद करते हैं। उम्मीदें ठीक हैं लेकिन अगर वे पूरी नहीं हुई तो नाराज होके अपनी  शादिशुदा जिंदगी खराब ना करे। क्योंकि विवाहित जीवन अपेक्षा से कई अधिक है।


गलत जानकारी।

जीवन साथी की खोज करते समय कुछ लोग अपने बारे में सही जानकारी नहीं देते हैं। ऐसी जानकारी सीधे जीवन साथी और उनके माता-पिता को गुमराह करती है और भविष्य में इसकी वजह से शादीके बाद में लड़ाई शुरू होती है। शादी तय करते समय अनावश्यक और बहुत अधिक वादे करना भी अच्छा नहीं है। कुछ माता-पिता और युवा अपने जीवन साथी को या अन्य पार्टियों को अपने हैसीयत से ज्यादा वादे करते हैं। जब ऐसे वादे प्रॉमिसर  पूरा नहीं करते हैं तभी शादीशुदा जिंदगी में झगड़े शुरू हो जाते है। इसलिए किसी की भी शादी तय करते समय गलत जानकारी ना दे और असंभव वादे न करें।


जबरदस्ती शादी।

हर माता-पिता और युवा को यह समझना चाहिए कि जबर्दस्ती की गई शादी ज्यादा सफल नहीं होती है। चाहे वह एक तरफा प्यार हो या बच्चे की उम्मीदों के खिलाफ हो। हर माता-पिता को अपने बच्चे की उम्मीदों को समझना चाहिए। उनकी अपेक्षाओं के अनुसार हमें उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। मनचाहा जीवनसाथी और उनकी उम्मीदों के पीछे के कारणों को समझना चाहिए।


मार्गदर्शन / सुझाव।

विवाह तय करते समय मार्गदर्शन और सुझाव बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज की पीढ़ी हमेशा इस तरह की बातों को नजरअंदाज करती है। प्रत्येक युवा / माता-पिता को विवाह का निर्णय लेते समय अपने माता-पिता और बड़े / अनुभव वाले व्यक्ति से मार्गदर्शन और सुझाव लेना चाहिए। क्योंकि यह कम समय का निर्णय नहीं है। हम अलग-अलग व्यक्ति से अलग-अलग सुझाव प्राप्त कर सकते हैं और यह हमेशा हमारे विवाह के निर्णय और जीवन के लिए फायदेमंद होगा।


दहेज और अनावश्यक मांगें।

दहेज और अनावश्यक मांग की वजह बहुत से महिलाओं पर अत्याचार होता है. ज्यादातर लोग शादी तय करते समय उम्मीद से ज्यादा की मांग करते हैं। जब महिला अभिभावकों द्वारा इस तरह की मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो उनकी बेटी को इसके कारण काफी नुकसान उठाना पड़ता है। अगर कोई शादी से पहले बहुत ज्यादा मांग करता है, तो यह उम्मीद न करें कि वे फिर कभी मांग नहीं करेंगे। इसलिए ऐसे लोगों से बचने की कोशिश करें।


वास्तविकता।

आज की पीढ़ी सोशल मीडिया की बहुत ज्यादा दीवानी है। वे जो भी देखते हैं, वैसा ही व्यवहार करने की कोशिश करते हैं। लेकिन वे कृत्रिम जीवन और वास्तविकता के बीच के अंतर को नहीं जानते हैं। हमें अपने बच्चेकी अपेक्षाएं वास्तविक जीवन अनुसार है  या नहीं यह देखना चाहिए। अगर यह रवैया आगे तकलीफ देय हो सकता है। हमें इसमें सुधार लाने की जरूरत है। सही समय में इसमें हमें सुधार लाने की जरूरत है ताकि हामारे बच्चो या परिजनोंकी शादीशुदा जीवन खुशहाल हो। 


विवाह और शिक्षा।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि शिक्षा सभी के लिए जरूरी है। लेकिन बाजार में विवाह शिक्षा वर्ग उपलब्ध नहीं है।आप अगर ज्यादा पढ़े लिखे है तो इसका मतलब यह नहीं है की आप शादीशुदा जिंदगी  ख़ुशी से बिताएंगे।विवाहित जीवन और शिक्षा के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। शिक्षा के साथ आप विभिन्न तरीकों से सोच सकते हैं और समस्याओं को सुलझाने का प्रयास कर सकते हैं। परिणामस्वरूप शिक्षित परिवारों में तलाक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।


भाग - २ (जल्द आ रहा है।)

Sunday, October 25, 2020

उड़ते हुए पंछी अपने घोंसले में वापस आ जाओ।

 उड़ते हुए पंछी अपने घोंसले में वापस आ जाओ। 

Come Back In Our Empty Nest. (Hindi)


पिछले कुछ महीनों से मैं "उड़ते हुए पंछी अपने घोंसले में वापस आ जाओ। " शीर्षक के साथ शुरुआत करने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि इस रिक्त पृष्ठ को कैसे भरें? सिर्फ 'खाली' शब्द के कारण मैं आगे सोच नहीं पा रहा हूँ। क्या अकेलापन इतना बुरा होता है। आप खाली पन्ने को कितनी देर देख सकते है, एक घंटे, एक दिन, एक महीना, या कई वर्ष। जब आपको अपने बच्चों की अधिक आवश्यकता होती है और वह दूसरे शहर में या विदेश में खुशी के साथ अपना जीवन बिता रहा होता है तभी आप कैसा महसूस करेंगे? 

बहुत से बूढ़े लोग इस शून्यता को केवल अपने बच्चों की वजह से महसूस करते हैं जो कुछ अन्य शहरों या विदेशों में रह रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं। जैसे शिक्षा, करियर, पारिवारिक विवाद आदि। बहुत से बुजुर्ग आज यह राह देखते है की कभी उनके बुढ़ापे का सहारा आएगा। कई बूढ़े लोग अपने बच्चों का इंतजार कर रहे हैं। कुछ बच्चे वापस आ जाते हैं और कुछ नहीं। ये अकेलापन कब शुरू होता है ?


बच्चा शिक्षा के लिए घर छोड़ रहा है।

शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन अधिकांश बच्चे इन बातों के बारे में नहीं जानते हैं कि उनके माता-पिता को कितना दुःख होता है। अगर एक से ज्यादा बच्चे हो तो इतना फर्क नहीं पड़ता पर अगर बच्चा अकेला हो तो उसके माता पिता को बहुत ज्यादा तकलीफ होती है। बच्चे तो अपने नए कॉलेज, दोस्तों में, काम में या अपने फॅमिली के साथ  मस्त रहते है। कई सारे बच्चों को उनके माता पिता की याद' भी नहीं आती है। 

हर शिक्षित छात्रों को पढ़ाई की तरह अपने माता-पिता की देखभाल के लिए जिम्मेदार होना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि शिक्षा छोड़ दो और वापस आओ। कम से कम आप दिन में एक बार एक कॉल कर सकते हैं। आप उनका हालचाल पूछ सकते है.


शादी के बाद।

शादी के बाद जोड़े हमेशा अपनी नई जीवन यात्रा में व्यस्त रहते हैं। ज्यादातर लोग शादी के बाद अपने माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। वे अपने माता-पिता के साथ ठीक से संवाद नहीं करते हैं और इस वजह से वे अपने जीवन में खालीपन महसूस करते हैं जो व्याख्यायनीय नहीं है। मुझे नहीं पता ये लोग अपने माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार कैसे करते हैं। मुझे पता है कि कोई उनके जीवन में आया है, लेकिन इससे पहले भी  कोई उनके जीवन में उपलब्ध है। जिन्होंने अपना जीवन अपने बच्चों के भविष्यके लिए बिताया है।  


पारिवारिक विवाद।

शादी के बाद कुछ पारिवारिक विवाद विभिन्न कारणों से शुरू होते हैं, जो पीढ़ी के अंतर के कारण होते हैं, पुराने लोगों के साथ समायोजन नहीं करना, स्वतंत्र परिवार की सोच और अपने बच्चों को बुजुर्ग लोगों से दूर रखने के लिए। और इस वजह से वे अपने घर में खालीपन महसूस करते हैं। सभी को इस तरह के मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि इस विवाद में बुजुर्ग लोगों का बहुत नुकसान होता है।


जरूरतों के लिए घर छोड़ना।

जिंदगी चलने के लिए और अपनी जिंदगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए हम पैसे जुटाने के लिए घर छोड़ते है. अगर आप विदेश में या किसी अन्य शहर में जबरदस्त पैसा कमा रहे हैं और आपके माता-पिता यहाँ असहाय हैं तो क्या यह आपका पैसा मूल्यवान है। आप अपने माता-पिता के लिए उच्च नौकरानी रखेंगे और उनके खर्च के लिए बहुत अधिक पैसा खर्च करेंगे। लेकिन आप पैसे के रूप में अपना स्नेह और प्यार कैसे देंगे। वृद्धावस्था में वे आपके पैसे, शानदार वस्तु नहीं चाहते हैं जो वे आपका प्यार चाहते हैं।


खुद के परिवार में व्यस्त हैं, या विदेश में रह रहे हैं।

शादी के बाद परिवार बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन कुछ बच्चे अपने माता-पिता के बारे में भूल जाते हैं, जो की उनके परिवार का हिस्सा भी हैं। वे अपने माता-पिता की जरूरतों का ध्यान नहीं रखते हैं। वे केवल अपने बच्चों और जीवनसाथी की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।  शादी के बाद कुछ बच्चे दूसरे शहरों या देश में शिफ्ट हो जाते हैं। इसके बाद वे अपने माता-पिता और उनकी आवश्यकताओं के बारे में भूल जाते हैं। वे बस उनके व्यवहार के कारण उन पर गुस्सा होते हैं। वे माता-पिता के बुढ़ापे की मानसिकता को समझने की कोशिश नहीं करते हैं।  हर बच्चों को यह समझना चाहिए और अपने माता-पिता का ख्याल रखना चाहिए।


 स्वतंत्र परिवार की मांग

स्वतंत्र परिवार की मांग के कारण, अधिकांश माता-पिता अपने बुढ़ापे में बहुत पीड़ित होते हैं। शादी के बाद युगल स्वतंत्र रूप से रहते हैं और अपने माता-पिता को भूल जाते हैं। ऐसी मांग जीवनसाथी और उनके माता-पिता से उठती है। अगर उस समय उनके अपने माता-पिता के साथ भी ऐसा ही हुआ तो वे इसका विरोध जरूर करते हैं।  हमें ऐसी प्रवृत्तियों को बदलना चाहिए।


माता-पिता को अलग करना

माता-पिता अपने बच्चों में कभी भेदभाव नहीं करते। वह उन्हें हमेशा साथ रखता है। लेकिन जब भी माता-पिता की देखभाल करने की बात आती है, तो बच्चों में केवल उनका विभाजन शुरू होता है। और सवाल होता है की कोण किसको और कितने दिन संभालेगा। क्या उसके माता-पिता बचपन में उसके साथ ऐसा व्यवहार करते थे? मुझे पता है कि कुछ अपरिहार्य स्थिति के कारण हम इस तरह का निर्णय लेते हैं, लेकिन हम ऐसी स्थिति से बचने के लिए अलग तरीका खोजने की कोशिश कर सकते हैं। हमें अपने माता-पिता के साथ अपने व्यवहार पर सोचना चाहिए। बुढ़ापे में माता-पिता को अपने जीवनसाथी की जरूरत होती है। हमें उस पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें विभाजित करके खाली घोंसला बनाने से बचने की कोशिश करनी चाहिए।


कुछ लोग ऐसे वृद्ध लोगों की मदद करते हैं और कहीं न कहीं उनके बच्चे की भूमिका पूरी करते हैं। हमारे पास ऐसे उदाहरण हैं जहां माता-पिता अपने बच्चों की प्रतीक्षा करते हुए गुजर गए, लेकिन बच्चे वापस नहीं आए। आपके सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष  किया है। वे   आपकी जरूरते पूरी करनेके लिए  अपनी इच्छा जाहिर नहीं करते।  आप जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन आप अपने माता-पिता को मत भूलिए, जिन्होंने आपको उस मुकाम तक पहुंचाने में सक्षम बनाया। 

मुझे उम्मीद है कि मेरा संदेश उन पक्षियों तक पहुंच जाएगा और वे अपने माता-पिता के खाली घोंसले में वापस आ जाएंगे।

Tuesday, September 8, 2020

जिम्मेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?

 

जिम्मेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
जिम्मेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?


हम सभी की अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं और हर कोई इसे निभनेकी अपने अपने तरीकेसे पूरी कोशिश करता है। पर क्या हम जानते है की ये क्यों इतनी महत्वपूर्ण है? और ये किस तरह हमारे जीवन में बदलाव करती है। जिम्मेदारियां बहोत अलग अलग होती है। जैसे की खुद के प्रति , अपने माता पिता और बच्चोके के प्रति,  अपने समाज के और देश के प्रति। हमें अपने बच्चों को हमारी जिम्मेदारियों का एहसास कराने की जरूरत है, जितना की  हम उन्हें अन्य नैतिक शिक्षा देते हैं।


अपने लक्ष्य को तय करने के लिए। 

मैंने देखा कि बहुत से लोगों के जीवन में लक्ष्य नहीं है और वे यह भी नहीं जानते कि अपने लक्ष्य को कैसे प्राप्त किया जाए। आपको अपना लक्ष्य निर्धारित करने के लिए जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस वजह से आप अपने जीवन के लक्ष्यों को निर्धारित कर सकते हैं जैसे वित्त, घर, विद्या का लक्ष्य, व्यावसायिक उपलब्धि और आधिकारिक उपलब्धियाँ आदि।


खुद को समजना। 

हम हर वक्त दूसरो को देखते रहते है। पर हम हमारे भीतर की खूबियोको परखने की या गलतियों को सुधरनेकी कोशिश नहीं करते। हम दूसरों को सकारात्मक या नकारात्मक चीजों को देखते हैं। लेकिन हम आपके आंतरिक गुणों का परीक्षण करने या अपनी गलतियों को सुधारने का प्रयास नहीं करते हैं। जिम्मेदारी आपको सोचने का उचित मार्ग देती है।


दूसरों की उपलब्धि से प्रेरित होना।

जैसा कि हम जानते हैं, कुछ लोगों को हमेशा दूसरों से जलन होती है। क्योंकि दूसरों ने अच्छी जगह हासिल की। जिम्मेदार व्यक्ति इस तरह कभी नहीं सोचते हैं। उसे हर समय ऐसी चीजों से नई आशा और प्रेरणा मिलती है। यही सोच का तरीका उन्हें हमेशा किसी भी क्षेत्र में आगे लाता है। हो सकता है कि अच्छे परिणामों के लिए कुछ समय लगेगा।


धैर्य सिखाती है।

हमने कई ऐसे युवा देखे हैं जो कभी धैर्य से काम नहीं लेते हैं। यही कारण है कि वे हमेशा अपने काम या व्यवहार में गलतियाँ करते हैं। यदि हम जिम्मेदार मनुष्यों के व्यवहार को देखते हैं, तो हम यह पता चलता हैं कि उन लोगों में अधिक धैर्य है। वे लोग किसी भी गतिविधि को करते समय हमेशा धैर्य रखते हैं।


निर्णय क्षमता बढ़ती है। 

निर्णय लेना जिन्दगी में बहुत महत्वपूर्ण है। जिम्मेदारी हमें सिखाती है की  किस बात का निर्णय लेना है, किस तरह लेना है, किस समय पर लेना है और उसके परिणामो को भी अवगत कराता है। जिम्मेदारी के वजह से निर्णय क्षमता बढ़ती है, जो की हमारे जीवन भर के लिए महत्वपूर्ण है।


एकता से काम के लिए। 

बड़े काम को पूरा करना हो तो हमें एकता की जरुरत होती है। ऐसी एकता हमें सभी जगह जरुरी होती है। जैसे की दफ्तर , खेल , शिक्षा , सामाजिक कार्य इत्यादि। एकता कायम करने के लिए हमें जिम्मेदारी का एहसास होना बहुत जरूरी है। जैसे हर समुदाय की जिम्मेदारी होती है, लेकिन उसके प्रत्येक उम्मीदवार को जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए। बड़े कार्यालयों में, एक अधिकारी  उसकी  जिम्मेदारी पता होती है, वैसे ही उसके सहयोगियों को भी उनके जिम्मेदारियोका पता होना चाहिए। साथ आकर अच्छा काम करने के लिए यह जरुरी है।


दूसरे की मदद करना।

जैसा कि हम सोचते हैं, दूसरों की मदद करना आसान नहीं है। यदि कोई आपातकालीन स्थिति के मामले में अन्य की मदद नहीं करता है, तो यह सीधे संकेत देता है कि ऐसे व्यक्ति को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में पता नहीं है। कई लोग स्कूल की उम्र या कार्यालय या अन्य सामाजिक गतिविधियों में एक-दूसरे की मदद करते हैं क्योंकि वे अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह से जानते हैं। यह लोग मानवताकी रक्षा करते हैं।


दूसरे का सम्मान करना।

बहुत सारे लोगों को अपने से बड़ों को, परिजनों और शिक्षकों  को इज्जत नहीं देते। इस तरह का बर्ताव हमें शोभा नहीं देता। क्योंकि यह बर्ताव हमारे संस्कारोंको दर्शाता है। यदि किसी को जिम्मेदारी के बारे में पता है तो वह व्यक्ति दूसरे का सम्मान करना जानता है। हमें अपने बच्चों को यह जिम्मेदारी देने की जरूरत है ताकि हमारे बच्चे अच्छे नागरिक बनें।


अच्छे प्रबंधन के लिए।

एक मजबूत प्रबंधन हमारे समाज के साथ-साथ संगठन की रीढ़ है। चाहे वह आधिकारिक हो या सामाजिक। एक गैर जिम्मेदाराना व्यवहार या निर्णय परियोजना और समाज को नष्ट कर देता है। व्यापार उद्योगों में विभिन्न उदाहरण उपलब्ध हैं कि कैसे एक गैर-जिम्मेदार निर्णय के कारण पूरा व्यापार साम्राज्य ध्वस्त हो गया। इसलिए हमें आगे बढ़ने के लिए जिम्मेदार प्रबंधन टीम की आवश्यकता है।


रिश्ते बचाने के लिए। 

कुछ लोग अपने जीवन में महत्वपूर्ण संबंध खो देते हैं चाहे वह पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चे, रिश्तेदार या कोई दोस्त हो। इसके पीछे कई कारण उपलब्ध हैं। इसे सुधारने के लिए कोई भी जिम्मेदारी ले सकता है। इइसके कारण कुछ टूटे हुए रिश्ते भी फिर से जुड़ जाएंगे। यदि हमारे समाज में ऐसा होता है, तो कई परिवार अपने प्यार करने वाले व्यक्ति (जीवनसाथी, माता-पिता, बच्चों, रिश्तेदारों और दोस्तों) के साथ अपना समय व्यतीत करेंगे और अपने जीवन में अधिक खुशियाँ भी प्राप्त करेंगे।

मैं आशा करता है कि अभी आप समज गए होंगे की अपने जिन्दगीमे जिम्मेदारिया होना कितना महत्वपूर्ण है। हम इसमें कैसे भूमिका निभाते हैं यह अलग बात है। यदि आप अपनी ज़िम्मेदारी को समझने के बाद काम करते हैं, तो आपको हर काम में आशा की किरण दिखाई देगी। इससे हमें अपने जीवन का मार्ग मिलेगा।

Saturday, June 13, 2020

क्यों हम पेशेवर बाइक सवार नही है?



क्यों हम पेशेवर बाइक सवार नही है?
हम सभी जानते हैं कि, इन दिनों लोग बाइक के दीवाने हैं। आमतौर पर युवा सबसे ज्यादा pagal होते हैं। अगर हम युवाओं के बारे में बात करते हैं, तो वह एक हवाई जहाज की तरह बाइक की सवारी करता है। हमारे आसपास के कई युवा दुर्घटना के कारण मर जाते हैं। पहले हमें यह जानना होगा कि हम अपने बच्चों को क्यों खोते हैं? इसके लिए और कौन जिम्मेदार है? और इससे कैसे बचा जा सकता है? इसे कैसे रोका जा सकता है?

बिना लाइसेंस के बाइक चलाना।
दो पहिया वाहन चलाने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य है। जैसा कि हम अच्छी तरह से जानते हैं, कुछ माता-पिता अपने बच्चों को कम उम्र में दो पहिया वाहन चलाना सिखाते हैं। यह अवैध है, लेकिन वे इसकी परवाह नहीं करते हैं और वे जानबूझकर अपने बच्चों को सड़क और शहर की सवारी करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस वजह से, कुछ बच्चे कम उम्र में बिना लाइसेंस के बाइक चलाते हैं। हमारे कई माता-पिता हैं जिन्होंने अपनी लापरवाही के कारण अपने बच्चों को खो दिया।


पेशेवर बाइक सवार से नहीं सीखना।
अधिकांश बाइक सवार अपने परिवार के सदस्य या अपने दोस्त से बाइक सीखते हैं। यह बुरा नहीं है, लेकिन जब भी हम किसी से सीख रहे हैं, तो उसके पास सरकारी अधिकृत लाइसेंस होना चाहिए और हमें शिक्षार्थियों के लाइसेंस की आवश्यकता है। जब हमें लर्निंग लाइसेंस मिल जाता है, तो हमें एक पिलर राइडर के साथ बाइक चलाना चाहिए, जिसके पास स्थायी लाइसेंस हो।

संकेत और प्रतीकों दुर्लक्षित करना
किसी भी दो पहिया या वाहन की सवारी करते समय संकेत और प्रतीक बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। वे हमें निर्देशित करते हैं कि आगे कैसे व्यवहार किया जाए या आगे क्या बाधाएं हैं। बहुत से लोग परिभाषित संकेत या नियमों का पालन नहीं करते हैं। इस व्यवहार से सड़क दुर्घटना होती है। यदि हम नियम का पालन नहीं कर रहे हैं या इसके संकेतों और संकेतों की अनदेखी कर रहे हैं, तो हम महत्व नहीं जानते हैं या हम इसका पालन नहीं करना चाहते हैं।

मौसमी परिवर्तनों को अनदेखा करना।
हर दो पहिया वाहन सवार के लिए मौसमी परिवर्तन हमेशा मायने रखता है। क्योंकि बाइक की सवारी संतुलन और निर्णय का कौशल है। बारिश के मौसम में बाइक की फिसलन की संभावना बहुत अधिक होती है । बारिश में दृश्यता भी कम हो जाती है । गर्मी के मौसम में, उच्च तापमान के कारण टायर फटना, बाइक में आग लगना या निर्जलीकरण दुर्लक्ष करणे योग्य नहीं है। हर बाइकर्स के लिए कोहरा बहुत खतरनाक है। इस कोहरे में दृश्यता हमेशा कम होती है। लेकिन मेरे अनुभव के अनुसार कुछ लोग इसकी परवाह नहीं करते हैं और दुर्घटना से मिलते हैं।

No U Turn.


मोढ़ पर धीरे-धीरे न बढ़ना।
मोड़ पर धीरे-धीरे चलना सभी के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन ज्यादातर लोग इस नैतिकता का पालन नहीं करते हैं। मोड़ पर आपका दृश्य क्षेत्र सीधी सड़क की तुलना में बहुत कम है। अपनी बाइक पर नियंत्रण रखने के लिए, सड़क की वक्रता और आपकी गति को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। मोड़ों पर गति में वृद्धि हमेशा खतरनाक होती है।


गलत दिशा / समय / जगह आगे बढ़ना।
हर कोई इन सामान्य गलतियों को कर सकता है। शहरी इलाकों में गलत साइड से ओवरटेक आम बात है। विपरीत दिशा के वाहन या बरसात के मौसम में संकेत के बिना ओवरटेक करें। मोड़ पर, घाटों के खंडों पर या बर्फ गिरने पर। ये कुछ गलतियाँ हैं जो हम बाइक चलाते समय कर रहे हैं।

सुरक्षा गियर और गार्ड नहीं लगाना पहनना।
जबकि हम बाइक राइडिंग के लिए जा रहे हैं। हमें हेलमेट और सुरक्षा गियर पहनना चाहिए जो बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे सुरक्षा उपकरण एक अच्छी गुणवत्ता के होने चाहिए। कुछ लोग बहुत महंगी बाइक का उपयोग करते हैं, लेकिन वे बहुत खराब सुरक्षा उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। कुछ लोग बहाने बना के हेलमेट की सख्ती का विरोध करते हैं। लेकिन वे हेलमेट के महत्व को नहीं जानते हैं। अच्छी क्वालिटी के गार्ड का इस्तेमाल करने से हमारी सुरक्षा बढ़ जाती है। 
बाइक के नियमित रखरखाव नहीं करना।
बाइक का नियमित रखरखाव आपके स्वास्थ्य की तरह बहुत महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से हमें तेल, ब्रेक, टायर हवा के दबाव की जांच करने की आवश्यकता है। लेकिन हम नहीं करते। कभी-कभी हमें अपनी बाइक के अधिक हिस्सों की जाँच करनी चाहिए जैसे टायर की पकड़, सभी छोटे भागों की फिटिंग। अपनी बाइक को अच्छी तरह से स्थिर रखने और हमारी सुरक्षा के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।


रेसिंग / जल्द बाइकिंग के बारे में पागल युवा 
आज के युवा रेसिंग / जल्द बाइकिंग के लिए बहुत ज्यादा पागल है। ज्यादातर युवा इसके कारण पहले ही मर चुके है। पागल बाइकर्स पागलपन के कारण कई लोग सड़क पर असहज महसूस करते हैं। इस प्रकार की बाइक की सवारी हर जगह निषिद्ध है। 

लंबे समय तक सवारी करना।
अगर आप बाइक की सवारी लंबे समय तक करते हैं तो यह आपके लिए बहुत खतरनाक है। लंबी सवारी के कारण, हम निर्जलित हो सकते हैं। हमें हड्डियों में दर्द भी हो सकता है। कभी-कभी, हम सो सकते हैं। कुछ समय बाद, हमें कुछ आराम करना चाहिए। 

माता-पिता की ज़िम्मेदारी।
अपने बच्चोके साथ कुछ बुरा होने से पहले हर माता-पिता को अपने बच्चों को बाइक देते समय कुछ सीमाएँ अवश्य रखनी चाहिए। हमें अपने बच्चों को रोड नियमों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। जब भी हमारे बच्चे दोस्तोंके साथ जाना चाहते है तभी हमें उन्हें कुछ नियम बताने जरुरी है। माता-पिता को अपने बच्चों को उच्च शक्ति वाली बाइक नहीं देनी चाहिए यदि वह उचित नियमों और विनियमों का पालन नहीं कर रहा है। जादा ताकद वाले बाइक के लिए अच्छी सड़क, फुल सुरक्षा गार्ड और अच्छे राइडर की जरूरत होती है।

व्यक्तिगत जिम्मेदारी। 
जी हाँ हम सबकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनती है की हम हमारे परिजनोंको ये सब नियमोंका पालन करनेकी सलाह देना। और हमें भी इसका पालन कारना चाहिए। रोड नियम का पालन करने के लिए हमें एक दूसरे को प्रेरित कारना होगा। क्योकि यह किसी एक इंसान का काम नहीं हैं।  

हम सभी वाहन खरीदते हैं, लेकिन हम अपनी सुरक्षा के लिए उन वाहनों का एक प्रतिशत खर्च नहीं कर सकते हैं, और यह बहुत दुख की बात है। हमारी एक गलती किसी के घर को तबाह कर सकती है। हम अपना पैसा बचा सकते हैं। यदि हम अपना कीमती जीवन, किसी भी जिम्मेदार परिवार के सदस्यों को खो देते हैं, तो कौन जिम्मेदार है?

Sunday, May 17, 2020

घरेलू हिंसा का कारण क्या है?

घरेलू हिंसा का कारण क्या है?
हेलो ,"पुलिस कृपा करके मेरी मदद करो!" ऐसे बहुत सारे कॉल मदद के लिए किये गए है। इस सब के पीछे घरेलू हिंसा का कारण है।  यह बात साबित करती है की, घरेलू हिंसा सिर्फ किसी एक देश में नहीं होती। यह सरे देशोंकी समस्या है।  इसके पीछे कई कारण हैं। जैसे शारीरिक, मानसिक , भावनात्मक, यौन और वित्तीय। इस लॉक डाउन में घरेलू हिंसा बढ़ी है। क्योंकि घर के अंदर हर कोई है। घरेलू हिंसा के कारणों को समझने और परिवारों के मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करने का यह सही समय है।

दहेज
यह अवैध है लेकिन फिर भी कुछ देशों में जारी है। दहेज के झगड़े के कारण बहुत से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे ही लड़की पैदा होती है, "यह हमारी बुरी किस्मत है!" ऐसा सोचनेवाले वाले लोग अभीभी कई जगहों पर मिलेंगे। अभी भी कुछ लोग लड़कियों को बोझ समझते है। सिर्फ इस दहेज के वजहसे। मुझे पता नहीं, यह सोच बदलेगी या नहीं।

विश्वास की कमी।
हर कोई कहता है कि भगवान एक रिश्ता बनाता है। लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि हम उस रिश्ते पर कितना भरोसा करते हैं। मामूली गलतफहमी घर में विवाद का कारण बनती है। इस समय, हम बस अन्य गलतियों की तलाश शुरू करते हैं और यही कारण है कि घरेलू हिंसा बढ़ जाती है।

अहंकार।
एक और सबसे बड़ा कारण अहंकार है। इसकी वजह घरेलू हिंसा भी है। पति-पत्नी, पिता, माता, भाई या भाभी, इनमें से किसी का भी अहंकार घरेलू हिंसा का कारण बन सकता है। ये उस चीज पर निर्भर करता है की, कौन इसको किस तरीके से नियंत्रित करता है। कभी-कभी, पुरुषों के वर्चस्व वाले परिवारों में इस तरह के मुद्दे होते हैं।

पुराने विचार।
आज तक कुछ परिवार पुरानी सोच का पालन कर रहे हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि पुराने विचार बुरे है, लेकिन उसके लिए कुछ सीमाएं हैं। दुनिया दिन-प्रतिदिन बदल रही है, उसी तरह हम कुछ विस्तार तक अपने विचार को संशोधित कर सकते हैं। पुराने और नए सोच के लोगो में अक्सर मत भेद होते है। और इसी के वजह से घरेलु हिंसा होनेकी सभावनाये बढ़ जाती है।

बुरी आदतें।
हां, बुरी आदतें भी घरेलू हिंसा का कारण हैं। शराब की लत या फिर गलत लोगों के साथ संबंध भी घरेलू हिंसा का कारण है। शराब के वजहसे लोग अपने आपका नियंत्रण को खो देते है, और वो  सभी चीजों को गलत नजरियेसे देखते है। गलत लोगों के साथ दोस्ती के वजह से, लोगो को गलत सलाह मिल जाती है। और इसी वजहसे गरेलु सम्बन्ध बिघड जाते है। कभी-कभी बाहरी अनैतिक संबंध के वजह से भी घरेलू हिंसा होती है।

स्वतंत्र परिवार।
अब भी कुछ परिवारों में स्वतंत्र पारिवारिक अवधारणा नहीं है। लोग संयुक्त परिवारों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। कारण वे व्यक्तिगत पारिवारिक अवधारणा की मांग या विश्वास कर रहे हैं। आज के नए सोच वाले लोंगो के या फिर इंडिपेंडेंट फॅमिली के वजहसे घर में हिंसाचार की स्थिति बन जाती है।

पारिवारिक नियमों और विनियमों के बीच अंतर।
जब शादी समारोह के कारण दो परिवार एक साथ आते हैं। दोनों के अपने नियम या कानून हैं। ये सभी चीजें उनके अतीत पर निर्भर करती हैं। कुछ परिवार खुले विचारों वाले होते हैं और कुछ अंतर्मुखी होते हैं। जब अंतर्मुखी परिवार के व्यक्ति खुले सोच के परिवार में व्यवहार करते हैं, उस समय वे इससे असहज महसूस कर रहे होते हैं। समान बातें खुले सोच वाले व्यक्ति के साथ भी होती हैं।

खुद का कैरियर या स्वतंत्रता।
अधिकांश समय यह कैरियर के आदी व्यक्ति के साथ हो रहा है। जो अपने करियर के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। करियर अच्छी चीजें हैं लेकिन करियर बनाते समय हमें बहुत सी चीजों को ताल मेल करना होगा। जीवन में स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है। जब भी हम अपने परिवार के साथ होते हैं, हमारी स्वतंत्रता हमारे परिवार के साथ होती है। जो इसके साथ समायोजित करने की कोशिश नहीं करते हैं, वही पे घरेलू हिंसा बढ़ने की संभावना है।

समझ की कमी। 
यह हमारे पारिवारिक संबंधों में एक बहुत महत्वपूर्ण बात है। पारिवारिक संबंध परिवार के प्रत्येक व्यक्ति की समझ पर संतुलित है। हमारे परिवार के व्यक्ति की भावना, उनकी जरूरतों और आवश्यकता, उनकी समस्याओं, लक्ष्य आदि की समझ में कमी। परिस्थितिओ और चीजों की समझ के कमी के कारण परिवार में गड़बड़ी हो जाती है और परिवार में घरेलू हिंसा बढ़ जाती है।

वित्तीय विवाद।
आज की पीढ़ी आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने की कोशिश करती है। यह अच्छा है लेकिन कुछ मामलों में वे पारिवारिक वित्तीय फैसलों में शामिल नहीं होना चाहते हैं। इसके कारण परिवार परेशान हो जाते हैं। कभी-कभी परिवार उन्हें वित्तीय निर्णय लेने की अनुमति नहीं देते हैं। या वे दहेज की तरह बार-बार पैसे की मांग कर रहे हैं। वे उसे अपने ही कमाए हुए धन से दूर रखते हैं। जब भी उसने इसके खिलाफ आवाज उठाई है वह घरेलू हिंसा से पीड़ित हुई है।

समाधान खोजने में देरी। 
जब भी हम घरेलू हिंसा का सामना कर रहे हैं, हमें जल्द से जल्द एक समाधान खोजने की जरूरत है। जैसे ही स्थिति खराब होती है, समाधान इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की समझ क्षमता कम हो जाती है और उनका दिमाग अहंकार, गलतफहमी से भरा होता है और उनका व्यवहार दुश्मन जैसा होता है। जब भी कोई खराब स्थिति होती है, तो ऐसी स्थिति को संभालना बहुत मुश्किल होता है।

घरेलू हिंसा को रोकना इतना आसान नहीं है। क्योंकि यह एक सीमित क्षेत्र में नहीं है, यह दुनिया में हर जगह होता है। इससे पहले कि वे खराब हो जाएं इसका समाधान खोजने के लिए तत्काल कार्रवाई के साथ हम इसे रोक सकते हैं। इसे रोकने के लिए कानून पर्याप्त नहीं हैं। हमें जागरूकता फैलाने की जरूरत है और परिवारों  सम्बंध मजबूत बनाने की भी कोशिश करनी चाहिए।

Monday, April 20, 2020

लॉक डाउन से हम क्या सीख सकते हैं?


लॉक डाउन से हम क्या सीख सकते हैं?

एक अजीब चीज बाहर से आती है और पूरी दुनिया को परेशान करती है। और सभी देश बंद हो जाते हैं। ये बहुत आसान लगता है क्योंकि सभी अपने छुट्टिओंके बारेमे सोच रहे थे। अभी हमें पता चला कि जैसे हम सोच रहे थे उतना ये आसान नहीं है। डॉक्टर लोगों की जान बचानेकी कोशीश कर रहे हैं। पुलिस वायरस के कम प्रभाव के लिए इस लॉक के प्रबंधन में लगे हुए हैं। मीडिया जागरूकता फैलाने की कोशिश करता है और कुछ अनगिनत सामाजिक कार्यकर्ता और मानव लोगों के लिए दैनदिन आवश्यक मदत कर रहे है। इस समय अमीर या गरीब, जाति, रंग और धर्म की पट्टी नहीं है। आगे बढ़ने से पहले मैं उन लोगों को सलाम करता हूं जो इस बड़ी चुनौतियों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगे हुए हैं। इसके अलावा, मैं उन लोगों का भी स्वागत करता हूं, जो अपने परिवार और अपने समाज के लिए घर पर रह रहे हैं और सोशल मीडिया का उपयोग कर प्रचार कर रहे हैं। हमें ये जानना जरुरी है की इस लॉक डाउन से हमें क्या सिख मिली।

हमारे पास अपने पारिवारिक रिश्तो को बढ़ाने का मौका है।
इस दौड़ती जिंदगी में बहुत सारे पारिवारिक संबंध  पहले से ही टूट रहे है। यह सही अवसर है कि हम उस पर विश्लेषण करके उन्हें बहुत मजबूत बना सकते हैं। उस पर अच्छा निर्णय लेने के लिए हमारे पास अच्छा समय है। इसके अलावा आप रिश्ते के मुद्दो को सुलझाने के लिए अपने शुभचिंतक या वरिष्ठ से मदद ले सकते हैं। हमें अपने प्यार और परिवार को समझने के लिए इस लॉकडाउन का फायदा उठाना चाहिए।

हम विलासिता की चीजों के बिना रह सकते हैं।
यह एक बहुत बड़ी बात है कि हम विलासिता की चीजों के बिना रह सकते हैं। पार्टियों के बिना, लंबी ड्राइव, कार्य, कार्यालय / लंबी यात्रा, कार्यालयिन तनाव, समय सीमा,लक्ष्य और ट्रेन, उड़ान, बस, टैक्सी और यातायात के मुद्दो की कोई देरी नहीं। आज हम सीख सकते हैं कि सीमित चीज़ों से खुद को कैसे बचाया जा सकता है। हम एक साधारण जीवन जी सकते हैं। इनके लिए हमें केवल रोटी, कपड़ा और घर चाहिए।

आत्म नियंत्रण और मन की शांति।
कुछ लोग इस सब चीजों को कुछ ज्यादा ही सहजता से लेते है। इस भागती दौड़ती जिंदगी में हर कोई अपने लिए समय नहीं मिलने की शिकायत करता है। यह एक अच्छा अवसर है जिसका सदुपयोग करके हम हमारे मन को नियंत्रीत कर सकते है।  हम आत्म नियंत्रण सीख सकते हैं और अपने परेशान मन को भी शांत कर सकते हैं। हम आत्म नियंत्रण के लिए ध्यान कर सकते हैं।

भविष्य की योजना की आवश्यकता है।
हम इस लॉकडाउन में अपने परिवार के लिए भविष्य की योजना बना सकते हैं। क्योंकि, आज की स्थिति के अनुसार हर कोई यह समझ गया है कि हमारे पास जो कुछ भी है वह हमारे भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। हमें भविष्य की और योजनाएं चाहिए।

प्रदूषण मुक्त वायु और वन्य जीवन। 
अब सब कुछ बंद हो गया है, कंपनी, परिवहन, भीड़, समुद्र के किनारे या सड़क पर या जंगली क्षेत्र में कोई नहीं भटक रहा है। यह एक बड़े विराम की तरह है और इसके कारण प्रदूषण कम हो गया है। धीरे-धीरे सभी जानवर सड़क पर और मानव स्थानों पर अपने जीवन का आनंद लेने के लिए निकले है। यह प्रकृति पर अच्छा प्रभाव है। शायद इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ हो।

केवल मानव ही सभी को बचा सकता है।
अभी केवल एक मानव दूसरे मानव को बचाने की कोशिश कर रहा है। इस पृथ्वी का अच्छा या बुरा मानव सोचता है। कुछ मानव की कर्मों का ही नतीजा हम सब भुगत रहे है। इसलिए मैं कह रहा हूं कि केवल इंसान ही इंसानों को बचा सकता है। यह लॉकडाउन हमें अवसर देता है कि हम मनुष्यों को बचाएं। हर कोई ऐसा करने की कोशिश कर रहा है।

मानवता से बड़ा कुछ नहीं है।
आज हम यह समझ रहे हैं कि, यदि हम इस पृथ्वी पर रहना चाहते हैं तो हमें एक दूसरे को बचाना चाहिए। इस बार हर कोई एक दूसरे की मदद कर रहा है। यह वायरस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमें मानवता सिखाता है। हम अपने परिवार और समाज के लिए ऐसा कर रहे हैं। हमारे परिवार, समाज और मानव को सुरक्षित रखने के लिए।

हर कोई चीजों को प्रबंधन करना सीख रहा है।
हां, हर कोई सीमित स्रोतों के साथ चीजों के साथ प्रबंधन करना सीख रहा है। इसके अलावा लोग वर्तमान स्थिति के साथ समायोजित करना सीख रहे है। संपूर्ण दुनिया सीख रही है कि कैसे गंभीर स्थिति और आपदा में प्रबंधन किया जाए। यह प्रबंधन सीखने का सबसे अच्छा समय है चाहे वह छोटा हो या बड़ा।

पूरी दुनिया इस जटिल युद्ध में फंस गई है।
हर देश अपने लोगों को इस घातक वायरस से बचाने में लगा हुआ है। ये लड़ाई उससे है जो आसानी से आंखोको नहीं दिखाई देता। इस खराब स्थिति से बाहर आने के लिए सभी देश एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। इस दुनिया में अप्रत्यक्ष रूप से मानवता बढ़ रही है।

यह मानवता के लिए प्रत्येक मनुष्य का प्रत्यक्ष परीक्षण है।
मानव जानता है कि कोई भी प्राकृतिक शक्ति को हरा नहीं सकता है। यह प्रकृति का खेल है और हम एक मोहरा हैं। हमेशा हमें अपने स्वभाव को सुधारनेका मौका मिलता है। यह पृथ्वी पे मानवता  जीवित है या नहीं, इसकी की जाँच करने के लिए प्रकृति द्वारा प्रबंधित किया गया अप्रत्यक्ष परीक्षण है।

जब भी मानव प्राकृतिक चीजों में हस्तक्षेप करता है तो निश्चित रूप से कुछ गलत होता है। आज हम जानवरों के जीवन को महसूस कर रहे हैं। आशा करता हु की सभी लोग समझ गए होंगे की इस लॉक डाउन से हम क्या सिख सकते है। आओ मिलकर इस महामारी से इस दुनिया को बचाएं। लॉक डाउन का अच्छा सदउपयोग करें। जनता जागृत हो जाये, हमारे योद्धाओं को प्रेरित करे और उन्हें प्रोत्साहित करे। और मानवता के लिए सरकार के आदेशों का पालन करें।

घर में रहें और सुरक्षित रहें!



Saturday, March 21, 2020

कोरोना (COVID-19) वायरस क्या है ?


कोरोना वायरस क्या है ?
जैसे की हम  जानते है , आज पुरे जग में एक बड़ी आफत आ  गई है।  कुछ लोग इस बतासे अभीभी परिचित होंगे या नहीं भी  होंगे या नहीं भी हो सकते है।  सभी लोगोके मन में कुछ  सवाल है , क्या है कोरोना ? उसके लक्षण क्या है ? उसके लिए सावधानिया कैसे बरते।  तो आइये जानते है कोरोना वायरस के बारेमे।

कोरोना वायरस क्या है ?
कोरोना ये एक वायरस है  कोवि २ नामसे जाना जाता है। और उसके वजहसे होनेवाला रोग उसे हम कोविद-१९ के नामसे जानते है। शायद यह बीमारी जानवरो या फिर इंसानो से आई है यह आशंका है। 

ये कहा और कभी मिली ?
यह बीमारी चाइना के वुहान शहर में दिसम्बर -२०१९ मिली। 

इसके लक्षण क्या है?
कुछ साधारण दिखनेवाले लक्षण जैसे की, बुखार आना, खासी आना, सर्दी, और सास लेनेमें दिक्कत होना। कुछ में सर दर्द , बदन दर्द। और कुछ मई किडनी  बंद होना और जान जानेकी आशंका है। 

यह कैसे फैलता है ?
 १) आप अगर जिसको हुआ है उनके संपर्क में आते हो। 
२) जिसको हुआ है उस इंसानने किसीभी स्पर्श किए चीज को आपका स्पर्श होनेसेभी हो सकता है। 
३) आप ऐसे इंसान के संपर्क में आते है जो की बीमारी फैले हुए इलाकेसे आया है। 
४) बीमार आदमीके खांसने या छींकनेसे भी यह हो सकता है। 
५) बीमार आदमी के खांसने या छींकनेसे जो छींटे गिरती है, और उससे आपका स्पर्श होता है तो यह फ़ैल सकता है। 

यह कितने देर तक जिन्दा रहता है ?
यह हवामान पे निर्भर करता है। और यह १४ से १९ घंटे तक जिन्दा है। 

यह कोनसे तापमान तक जिन्दा रहता है?
यह अलग जगह पर निर्भर करता है। ज्यादा से ज्यादा ५० डिग्री। 

इसे फ़ैलनेसे कैसे रोके ?
१) हर बार हाथ धोना।
२) खांसने या छींकने के वक्त मास्क या फिर रुमाल या फिर कपडा पकड़ना। 
३) भीड़ भाड़ की जगह नहीं जाना।
४) शाकाहारी और मांसाहारी खाना अछेसे गर्म करके खाना। 
५) बीमार आदमीसे दूर रहना। 
६) आपके कपडे रोज दवाई डालके धो देना। 
७) अपने चेहरेको, कान, नक्, या  मुँह को हाथ नहीं लगाना। 
८) भीड़ वाली वाहनों का पउपयोग न करे। 
९) आप हैंडग्लोव्स का उपयोग कर सकते है। 
१०) अलग वस्तुओका प्रयोग करे। 
११) जरुरत ना होने पे बहार न जाये। 
१२) अपने पास सांइटिज़ेर रखे। 

क्या यह हवासे फैलता है ?
नहीं, यह हवासे नहीं फैलता।

किस प्रकार का मास्क अच्छा है ?
एन ९५ अच्छा है।  हम रुमाल या फिर कपडा भी इस्तेमाल कर सकते है।

किसने मास्क पहनना चाहिए ?
जो आदमी बीमार है और जिसको बुखार, खासी, सर्दी, और सास लेनेमें दिक्कत हो रही हो ऐसे लोगोने पहनना जरुरी है।

मास्क को कैसे निकले ?
मास्क के ऊपरी हिस्से को पकड़ना नहीं है। सिर्फ हमें उसके रस्सी को पकडके निकलना है।

अगर मेरे पास मास्क नहीं है तो मैं किस तरह सर्दी या खासी रोक सकता हु ?
१) सर्दी आतेही आप निचे की तरफ झुके अगर आपके पास कुछ न हो तो। इससे जो भी कीटाणु है वो फर्श पद पड़ेंगे।
२) आप आपकी कोहनी का भी इस्तेमाल कर सकते है। आपकी कोहनी खासते और छींकते वक्त आगे कर ले इससे किसीके ऊपर नहीं जायेगा। और वैसेभी हम सब हाथ के कोहनी को ज्यादातर छूते नहीं है।

 इसके लक्षण कभी दिखते है ?
१४ दिन के भीतर ही इसके लक्षण दिखाई देते है।

ये किसको सबसे ज्यादा जल्दी जकड़ता है ?
छोटे बच्चो , गर्भधारी माता , और ६० के ऊपर वाले लोगो को ज्यादा नुकसान पहुँचता है।

ये धोकादायक क्यों है और क्यों नहीं ?
ये धोखादायक है , क्योकि इसको पता करना इतना आसान नहीं है।  ये कीटाणु १४ घंटे तक जिन्दा रह सकता है।
अगर आप अच्छी तरीकेसे ख्याल रखेंगे तो इससे बचा जा सकता है।

ये किसपे ज्यादा असर करता है ?
जिसको पुराणी सर्दी, खासी या फिर मधुमेह जैसी बीमारी वाले को असर करता है।

कितने प्रतिशत लोगोकी मृत्यु होती है ?
२% लोगोकी मृत्यु होती है।

इसपे कोई दवाई है ?
नहीं इसपे कोई दवाई नहीं है। दवाई की खोज शुरू है।

हाथ धोना क्यों जरुरी है ?
क्यों की हम बहोत सी चीजोंको हाथ लगते है। इससे ये बीमारी फ़ैलनेकी संभावना है।

मानसिक तौर पे क्या असर इंसान पर हो रहा है ?
मानसिक तौर पे लोग डर महसूस कर रहे है। ये जो की बार बार उस बीमारीका जिक्र होता रहता है हर जगह।
साधरण खासी पे भी लोग डरने लगे है। कुछ लोगोने तो खुदको डर के मरे कैद कर लिया है। कुछ लोग जिनेकी आशा छोड़ दी है।

अंधरुनी ताकद को कैसे बढ़ाये ?
ताजा और अच्छा पकाया हुआ खाना खाये। आप फल का रस ले सकते है।  रोजाना व्यायाम करना ना भूले। अच्छी नींद ले।

क्या हम शाहकारी या मांसाहारी खाना खाये?
जी हा, आप खा सकते है। पर सब्जी को अच्छी तरह धो ले। और मांसाहार को भी अच्छी तरह धोके पकाएं।
आधा पकाया हुआ खाना नहीं खाये।

सांइटिज़ेर क्या है और ये हाथ धोने  के लिए क्यों जरुरी है ?
ये के पानी के या गाढ़े जेल की तरह होता है। इसका उपयोग हातो के कीटाणु धोने के लिए और मारने के लिए काम आता है।

सरकारने स्कूल और कॉलेज को छुट्टिया क्यों दी ?
क्योकि, आम तौर पर बचौ को यह बात नहीं समाज आती है। और बच्चे हर बार सभी जगहको हाथ लगाते है। और बड़े बच्चे इस बातको गंभीरता से नहीं लेते।

बड़े दुकान , बगीचा, जिम, पर्यटन स्थल, पूजा स्थल क्यों बंद किये है ?
सिर्फ जनता के बचाव के'लिए। जनता इस बातको गंभीरतासे नहीं ले रही है।

सरकारने अबुलन्स के साथ पुलिस क्यों भेज रही है।
क्योकि कुछ लोग अभी भी इसको गंभीरतासे ना लेते हुए इलाज या फिर चेककिंग के लिए नहीं आ रहे।
ना चाहते हुए भी सरकारको पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है।

संधिग्द को अलगाव क्यों जरुरी है ?
क्योकि हमें इसे रोकना है और है।  और इसकी कोई दवा नहीं है।  सिर्फ ऐसे जगहपे ही इसका इलाज हो सकता है। और लोगो को अलग रखनेसे फैलाव कम किया जा सकता है।

इस वायरस को जल्द से जल्द रोकना जरुरी क्यों है ?
लोग डर रहे है। ये अपने सभी व्यापर असर कर रहा है। ये सभी देशोंकी आर्थिक स्थिति पर असर कर रहा है। जो की भोत घातक है भविष्य के लिए। ज्यादा बार हाथ  और कपडे धोनेसे अपने पानीके स्त्रोत पर भी असर हो।

तो फिर, सतर्क रहे, स्वस्थ रहे और साथ आइये इस मुश्किल घडी में। ये वक्त भी बित जायेगा।

Thursday, December 19, 2019

माता-पिता की जिम्मेदारियाँ.


हमारे जीवन में बोहोत सारी जिम्मेदारियाँ होती है. इसमें हम सब अलग अलग किरदार अदा करते है. जैसे की बच्चोंका, युवा का, जिम्मेदार नागरिक या फिर व्यक्ती, जैसे की माता-पिता, चाचा-चाची, नाना-नानी इत्यादी.
और इन जिम्मेदारियो मे से एक परिजनोका किरदार सबसे महत्वपूर्ण है. हम इसको बहु कार्यकारी कह सकते है.

क्यों बहु कार्यकारी?
इस उम्र में माता पिताकी जिम्मेदारियां ज्यादा होती है. अपने बच्चोके प्रति, माता-पिता के प्रति, सामाजिक और कार्यालयीन इत्यादी. हर एक जिम्मेदारी के प्रति उनका बर्ताव अलग होता है. जैसे की हम जानते है की आज कल के बच्चोको संभालना इतना आसान नहीं रहा। और बढ़ोकि अलगही आशाएं होती है अपने बेटे या बहु से। और अगर सामाजिक जिम्मेदीरीओ की बात की जाये तो वो बयां भी नहीं कर सकते।
   
क्या माता-पिता का किरदार ज्यादा कठीन होता है अपने दफ्तर के कामसे?
पहले तो हमें परिस्थितिओको समझना चाहिए। दफ्तर का काम करने से पहले हम ने पाठशाला, महाविद्यालय में 
और दफ्तर प्रशिक्षण दे दिया जाता है, पर अगर बात करे माता-पिता की जिम्मेदारिओकी तो इसके लिए ऐसा कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। ये तो सिर्फ हमारे पुराने खुद के अवलोकन पे और बढ़ो के मार्गदर्शन पे निरभर करता है। 

क्या बुजुर्गोका मार्गदर्शन जरुरी है?
इसमें कोई शंका या दोहराई नहीं है, क्योकि हमारे पास कोई शैक्षणिक उपलब्धता नहीं है जो की हमें बच्चो को कैसे संभालना है ये सीखा सखे। हमारे संस्कार जिन्दा रखने के लिए बुजुर्गोका मार्गदर्शन अत्यावश्यक है। इस मार्गदर्शन के वजहसे बच्चो को संभालनेके हमें बहोतो से मार्ग मिल जाते है। बहोतसे परिवार शहरोमे रहते है जो की बुज़ुर्गोंका साथ रहना पसंत नहीं करते पर वे बुज़ुर्गोंके मार्गदर्शन का महत्त्व नहीं जानते।

संस्कार।
जिम्मेदारियोंमे यह एक पहेली महत्त्व पूर्ण जिम्मेदारी है।  यह सिर्फ अपने एक माता-पिता की नहीं यही बलकी सभी माता-पिताओंकी है। क्योकि सभी बच्चे एक साथ बड़े होते है और वे सब भविष्यके अच्छे समाजका हिसा है। भले हमारा बच्चा बुरा बर्ताव करे हम दुसरेके बच्चों को ही कोसते है, हम हमारे बच्चों को मार्गदर्शन नहीं करते। हम हमारे बचेको सलाह देते है की उसके साथ नहीं खेलना। कुछ माता-पिता तो अपने बच्चों के सामनेही झगड़ते है पर वे यह भूल जाते है की उनके बच्चे यह सब उनसे सिख रहे है।

शिक्षात्मक जिम्मेदारियाँ। 
सभी माता-पिता अपने बच्चों के अच्छे भविष के लिए बोहोत प्रयत्न करते है। हमारे बच्चे किस दिशा में इच्छुक और अग्रेसर है  और कहा वे संतुष्ट है यह जानना जरुरी है। अपने बचे के पढाई के लिए माता-पिता शिक्षण पे कर्जा उठाते है और आशा करते है की उसने कामकाज ही  करना चाइये, परंतु वे यह भूल जाते है की अपने बच्चों के इच्छायें  क्या है। 

सामाजिक जिम्मेदारियाँ। 
ये सबसे महत्वपुर्ण जिम्मेदारी है जो की अपने बच्चोको सिखानी जरुरी है। पर माता-पिता इसमें सफल नहीं हो पाते। हम सिर्फ यही सिखाते है की कैसे अच्छी जिंदगी जीने के लिए पैसे कमाए जाये, और इसी वजहसे हमारे बच्चे  खुदगर्ज बन जाते है। सामाजिक जिम्मेदारिया जैसे की दुसरोको मदत करना , सरकार और सामजिक कामो में हाथ बाटना इत्यादि. समाजमे बेहतर इंसान बनानेके लिए यह बोहोत प्रभवी चीज है।

अपने माता-पिता की जिम्मेदारियाँ। 
जी हाँ अपने माता पिता की जिमेदिरियाँ। आज की पीढ़ी बहोतसे कारणोंके कारण अपने माता-पिता को संभालती नहीं है। इसी कारण बहोतसे बुजुर्ग वृद्धाश्रम में रहते है। पर वे यह भूल जाते है की उनके बच्चे यह सब उनसे सिख रहे है। जो माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों के अच्छी परवरिश में गुजारते है और आजकी पीढ़ी यह सब भूल जाती है। इसी कारन बहोतसे बुजुर्ग परेशानी में जीते है।

निर्णय लेनेकी आज़ादी।
सभीको सोच के निर्णय लेने की आज़ादीकी जरुरत है।  हमारे बच्चे कोई मशीन या रोबॉट नहीं है। हमें बच्चोंको  उनका लक्ष्य चुननेका और निर्णय लेनेका अवसर देना चाहिए। उनके सपने पुरे करनेके लिए जिन्दागी के हर मोड़ पे हमें उनकी मदत करनी चाइये।

इसी वजहसे माता-पिता इस समाजका महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो की खुदकी ख्वायिशो का त्याग करते है अपने बच्चों , समाज और माता-पिता के लिएउनके व्यवहार का असर आजकी पीढ़ियों पड़ता है। वे हमारे समाजके मार्गदर्शक है।  उनके निर्णय बोहोत मायने रखते है भविष्य के लिये।

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